राजस्थानी संगीत में जनजातियों का योगदान: एक अध्ययन

लेखक

  • निशी चौहान
  • प्रो0 डॉ0 भावना ग्रोवर

सार

राजस्थान अपने समृद्ध इतिहास, जीवतं रंग और संस्कृति के लिए जाना जाता है। अरावली की पर्वत श्रेणी की तलहटी  विचरण करने वाली अनेकों जनजातियों का योगदान राजस्थान के संगीत में सर्व सराहनीय हैं। राजस्थान में निवास करने वाली जनजातियों ने न केवल अपनी वीरता अपितु अपनी अनछुई संस्कृति, सभ्यता के अतिरिक्त संगीत की तीनों विधाओं मे विश्व स्तर तक पहचान दिलाई हैं । अपनी परंपराओं को सहेजने वाली कुछ निम्न जनजातियो एवं उनके द्वारा परिरक्षित संगीत का उल्लेख शोधार्थी अपने शोध-पत्र में करेगी। उनके द्वारा गायन व वादन व नृत्य की विधाओं का वर्णन करने का प्रयास किया गया हैं, किन्तु इन सांगीतिक सभ्यता का पालन करने वाले वह लोक संगीतज्ञ या तो कम हो गये हैं विलुप्त होने के स्तर पर हैं। जिसका उल्लेख शोधार्थी ने अपने शोध पत्र में किया हैं।  शोधार्थी अपने शोध- पत्र द्वारा राजस्थान की जनजातियों के संगीत की चर्चा कर उन्हें जीवंत करने का प्रयास किया हैं। शोधाार्थी के शोध- पत्र द्वारा शायद राजस्थान की जनजातियों के संगीत का चलन लोक मनुजो पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता हैं ,जिससे उनके संगीत को सहेजने के लिए नये शोधार्थीयों को एक नई दिशा मिले।

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निशी चौहान

शोधार्थी
मंच कला विभाग, ललित कला संकाय
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ‒250005, उत्तर प्रदेश, भारत
Chauhan.nishi500@gmail.com 

प्रो0 डॉ0 भावना ग्रोवर

निर्देशिका
विभागाध्यक्षा, मंच कला विभाग, ललित कला संकाय
स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ‒250005, उत्तर प्रदेश, भारत

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प्रकाशित

2026-06-09

अंक

खंड

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