इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के युग में विलुप्त होती पारम्परिक कलाएँ

लेखक

  • पूजा शर्मा
  • प्रो॰ (डॉ.) पूजा गुप्ता

सार

वर्तमान समय में इंटरनेट एवं सोशल मीडिया ने मानव जीवन की जीवनशैली, विचारधारा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। डिजिटल तकनीकों के तीव्र विकास ने जहाँ संचार के साधनों को सरल एवं तीव्र बनाया है, वहीं पारम्परिक कला एवं संस्कृति के समक्ष नई चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं। भारतीय पारम्परिक कलाएँ, जैसे लोकचित्रण, भित्ति चित्रकला, लोकनृत्य, लोकसंगीत, कठपुतली कला एवं हस्तशिल्प, आधुनिक डिजिटल मनोरंजन एवं पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण धीरे-धीरे विलुप्ति की ओर अग्रसर हैं।  युवा पीढ़ी का झुकाव सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग एवं डिजिटल कंटेंट की ओर अधिक होने से पारम्परिक कला के प्रति रुचि में कमी देखी जा रही है। इसके विपरीत, इंटरनेट एवं सोशल मीडिया पारम्परिक कला के संरक्षण एवं वैश्विक प्रचार का प्रभावी माध्यम भी बन रहे हैं। प्रस्तुत शोध पत्र में इंटरनेट एवं सोशल मीडिया के युग में विलुप्त होती पारम्परिक कलाओं की स्थिति, कारण, चुनौतियाँ तथा संरक्षण की संभावनाओं का अध्ययन किया गया है। 

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पूजा शर्मा

शोधार्थी
ललित कला विभाग
स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ

प्रो॰ (डॉ.) पूजा गुप्ता

शोध निर्देशक
ललित कला विभागाध्यक्ष
ललित कला संकाय, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ

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प्रकाशित

2026-05-30

अंक

खंड

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