भारतीय शिक्षा प्रणाली का ऐतिहासिक महत्व और राष्ट्रीय उत्थान में इसकी भूमिका

लेखक

  • राहुल शर्मा शोध छात्र

सार

भारतीय सभ्यता की जड़ें इतनी गहरी हैं कि वे सदियों से ज्ञान की नदियों को सींचती आई हैं, और शिक्षा इस सभ्यता का वह आधार रही है जो व्यक्ति को न केवल बौद्धिक रूप से मजबूत बनाती है, बल्कि उसे जीवन के हर आयाम में संतुलन सिखाती है। प्राचीन काल में शिक्षा का मतलब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं था; यह एक ऐसी प्रक्रिया थी जो इंसान को उसके भीतर की शक्तियों से जोड़ती थी, उसे नैतिक, आर्थिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाती थी। उस दौर में शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति का सर्वांगीण विकास करना था, जहाँ जीवन के चार मुख्य लक्ष्यों धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को हासिल करने की दिशा में मार्गदर्शन मिलता था। यह प्रणाली समाज को एकजुट रखती थी, क्योंकि इसमें हर वर्ग और समुदाय का योगदान था, और शिक्षा किसी शासकीय नियंत्रण से मुक्त होकर समाज की साझी जिम्मेदारी बनी हुई थी।

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राधा गोविन्द विश्वविद्यालय

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प्रकाशित

2026-01-22