अर्की महल के भित्ति चित्रों में श्रीकृष्ण लीलाओं के चित्रों का विश्लेषणात्मक अध्ययन

Authors

  • बरखा
  • डॉ0 पवनेन्द्र कुमार तिवारी

Abstract

हिमाचल प्रदेश सोलन जिले में स्थित अर्की महल, बाघल रियासत की एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर है, जो अपनी भित्ति चित्रकला के लिए महत्वपूर्ण व विशेष रूप से प्रसिद्ध है। चहाँ की चित्रकला पहाड़ी शैली का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसमें धार्मिक, पौराणिक तथा लोक जीवन से जुड़े विविध विषयों का चित्रण मिलता है। विशेष रूप से कृष्ण लीलाओं से सम्बन्धित चित्र इस कला परम्परा का मुख्य आकर्षण है।
अर्की महल की भित्ति चित्रकला अपनी सौन्दर्यता, उत्कृष्ट गुणवत्ता, मौलिकता, पूर्णता और सूक्ष्मता के लिए प्रसिद्ध है। इन भित्ति चित्रों का विकास मुख्य रूप से 16वीं शताब्दी के अन्त और 17वीं शताब्दी के प्रारम्भ तथा 18वीं शताब्दी के बीच हुआ। और यह कला बाघल के शाही दरबारों में फली-फूली और समृद्ध हुई। यह कला प्रद्धति राजपूत लघुचित्र शैली से प्रभावित है, जिसका उद्भव व विकास पंजाब की पहाड़ी रियासतों जैसे:- गुलेर, काँगड़ा, बाघल आदि में हुआ। राजपूत लघु चित्रकला शैली में प्रेम प्रसंगों, पौराणिक विषयों और धार्मिक कथाओं से सम्बन्धित विषयों को भी चित्रित किया गया है जो हिन्दू धर्म और वैष्णव धर्म व परम्परा से सम्बन्धित है।
इस विषय का उद्देश्य अर्की महल में चित्रित कृष्ण लीलाओं से सम्बन्धित चित्रों का विश्लेषण करना है जिससे उनके कलात्मक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक आयामों को समझने का प्रयास किया गया है। इन चित्रों से यह स्पष्ट होता है कि चित्रों में वैष्णव परम्परा, प्राकृतिक सौन्दर्य, भावात्मक अभिव्यक्ति और रंग-रचना का अद्भुत मिश्रण है। ये चित्र न केवल धार्मिक कथाओं को दर्शाते हैं, बल्कि हमारे समाज, संस्कृति और सौन्दर्य-बोध का भी प्रतिबिम्ब प्रस्तुत करते हैं।

Author Biographies

बरखा

शोधार्थी
ललित कला विभाग, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ
ई-मेल:- neeraj2_5@yahoo.com

डॉ0 पवनेन्द्र कुमार तिवारी

शोध निर्देशक, सहायक प्रोफेसर, चित्रकला विभाग
ललित कला विभागाध्यक्ष
ललित कला संकाय, स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ

Downloads

Published

29-05-2026

Issue

Section

Articles